बाबा खाटू श्याम का इतिहास
कलियुग के देवता — बर्बरीक से श्याम बाबा तक की अलौकिक यात्रा
बर्बरीक — तीन बाण धारी महावीर
महाभारत युद्ध से पूर्व, बर्बरीक — भीम के पुत्र घटोत्कच के पुत्र — एक अद्भुत योद्धा थे। उन्हें देवी का वरदान था कि उनके पास तीन दिव्य बाण होंगे जो पूरी सृष्टि को जीत सकते हैं। ये तीनों बाण इतने शक्तिशाली थे कि वे अकेले ही महाभारत युद्ध का परिणाम बदल सकते थे।
उनका संकल्प था कि वे हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। यह जानकर श्री कृष्ण चिंतित हुए। यदि बर्बरीक युद्ध में शामिल होते, तो वे दोनों पक्षों में बारी-बारी जीतने वाले का विरोध करते और अंततः अकेले ही रह जाते।
"हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा" — यही बर्बरीक की भावना थी जो आज भी करोड़ों भक्तों के दिलों में जीती है।
शीश दान — इतिहास का महान बलिदान
श्री कृष्ण ने ब्राह्मण वेश में बर्बरीक से दान माँगा — उनका शीश!
कृष्ण का ब्राह्मण रूप
श्री कृष्ण एक ब्राह्मण का रूप धारण करके बर्बरीक के सामने आए और उनसे दान माँगा।
शीश का दान
कृष्ण ने बर्बरीक से उनका शीश माँगा। बर्बरीक ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना शीश देने की सहमति जताई।
कृष्ण का प्रकट होना
शीश दान के बाद कृष्ण ने अपना असली रूप प्रकट किया और बर्बरीक को आशीर्वाद दिया।
कलियुग का वरदान
कृष्ण ने कहा: "कलियुग में तुम श्याम के नाम से पूजे जाओगे और सभी हारे हुओं को सहारा दोगे।"
खाटू श्याम मंदिर — पवित्र धाम
राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम में, रूपसिंह चौहान को स्वप्न में बाबा के शीश का दिव्य दर्शन हुआ। वहाँ खुदाई करने पर बाबा का पवित्र शीश प्राप्त हुआ। तत्पश्चात् वहाँ भव्य मंदिर की स्थापना की गई।
यह मंदिर सफेद संगमरमर से निर्मित है और इसकी वास्तुकला अत्यंत भव्य है। मंदिर परिसर में श्याम कुंड, श्याम बाग और अनेक धार्मिक स्थल हैं।
प्रति वर्ष फाल्गुन शुक्ल द्वादशी को लगने वाला लखदातार मेला देश का सबसे बड़ा धार्मिक मेलों में से एक है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं।
ऐतिहासिक कालक्रम
बर्बरीक का जन्म
घटोत्कच और मौरवी के पुत्र बर्बरीक का जन्म महाभारत काल में हुआ।
शीश दान
कुरुक्षेत्र युद्ध से पूर्व बर्बरीक ने अपना शीश श्री कृष्ण को दान किया।
खाटू में प्राकट्य
कलियुग में खाटू गाँव में बर्बरीक का शीश प्रकट हुआ और श्याम बाबा के रूप में पूजा आरम्भ हुई।
विश्व भर में प्रसिद्धि
आज देश-विदेश में करोड़ों भक्त बाबा खाटू श्याम की भक्ति करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खाटू श्याम मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है। यह जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर है।
बाबा खाटू श्याम को महाभारत के बर्बरीक का अवतार माना जाता है। कलियुग में वे श्याम बाबा के नाम से पूजे जाते हैं।
मुख्य मेला फाल्गुन माह (फरवरी-मार्च) में शुक्ल पक्ष की एकादशी से त्रयोदशी तक चलता है। इसे लखदातार मेला भी कहते हैं।
मंदिर प्रातः 4:30 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है। आरती समय पर विशेष दर्शन होते हैं।
बाबा के दर्शन करें
खाटू धाम आएं और बाबा श्याम का आशीर्वाद लें। हारे हुए को सहारा देने वाले बाबा की शरण में आएं।